पवित्र क़ुरआन और जीव विज्ञान-The Holy Qur'an & Biology

पवित्र क़ुरआन और जीव विज्ञान
》पशुओं और परिंदों का समाजी जीवन:
-धरती पर चलने वाले किसी पशु और हवा में परों से उड़ने वाले किसी परिंदे को देख लो यह सब तुम्हारे ही जैसी नस्लें हैं और हम ने उनका भाग्य लिखने में कोई कसर नहीं छोड़ी हैः
☆—फिर यह सब अपने रब की ओर समेटे जाते हैं। ——(अल-क़ुरआन सूर: 6 आयत: 38 )
शोध से यह भी प्रमाणित हो चुका है कि पशु और परिंदे भी समुदायों:communitities के रूप में रहते हैं। अर्थात उनमें भी एक सांगठनिक आचार व्यवस्था होती है। वह मिल जुल कर रहते और काम भी करते हैं।
》परिन्दों की उड़ान:
क्या उन लोगों ने कभी परिन्दों को नहीं देखा कि आकाश मण्डल में किस प्रकार सुरिक्षत रहते हैं अल्लाह के सिवा किसने उनको थाम रखा है? इसमें बहुत सी निशनियां हैं उन लोगों के लिये जो ईमान लाते है ! (अल-क़ुरआन सूर: 16 आयत 79)
एक और आयत में परिन्दों पर कुछ इस अंदाज़ से बात की गई है:
☆—यह लोग अपने ऊपर उड़ने वाले परिन्दों को पर फैलाते और सुकेड़ते नहीं देखते ? रहमान् के सिवा कोई नहीं जो उन्हें थामे हुए हो वही प्रत्येक वस्तु का निगहबान है!——(अल-क़ुरआन सूरह:79 आयत 19)
अरबी शब्द ‘अमसक‘ का ‘शाब्दिक अर्थ‘ है, किसी के हाथ में हाथ देना रोकना थामना या किसी की कमर पकड़ लेना। उपर्युक्त आयात में युमसिकुहुन्न‘ की अभिव्यक्ति है कि अल्लाह तआला अपनी प्रकृति और अपनी शक्ति से परिन्दों को हवा में थामे रखता है। इन पवित्र रब्बानी आयतों में इस सत्य पर जो़र दिया गया है कि परिन्दों की कार्य क्षमता पूर्णतया उन विधानों पर निर्भर है जिसकी रचना अल्लाह तआला ने की और जिन्हें हम प्राकृतिक नियमों के नाम से जानते हैं।
आधुनिक विज्ञान से यह भी प्रमाणित हो चुका है कि कुछ परिन्दों में उड़ान की बेमिसाल और दोषमुक्त क्षमता का सम्बंध उस व्यापक और संगठित ‘‘योजनाबंदी(programming) से है जिसमें परिन्दों के दैहिक कार्य शामिल हैं। जैसे हज़ारों मील दूर तक स्थानान्तरण (transfer) करने वाले परिन्दों की प्रजनन प्रक्रिया (genetic codes) में उनकी यात्रा का सारा विवरण मौजूद है जो उन परिन्दों को उड़ान के योग्य बनाती है और यह कि वह अल्प आयु में भी लम्बी यात्रा के किसी अनुभव के बिना और किसी शिक्षक या रहनुमा के बिना ही हज़ारों मील की यात्रा तय कर लेते हैं और अन्जान रास्तों से उड़ान करते चले जाते हैं बात यात्रा की एक तरफ़ा समाप्ति पर ही ख़त्म नहीं होती बल्कि वे सब परिन्दे एक नियत तिथि और समय पर अपने अस्थाई घर से उड़ान भरते हैं और हज़ारों मील वापसी की यात्रा कर के एक बार फिर अपने घोंसलों तक बिल्कुल ठीक-ठीक जा पहुंचते हैं।
-प्रोफेसर हॅम्बर्गर ने अपनी किताब पावर एण्ड फ़्रीजिलिटी में ‘‘मटन बर्ड नामक एक परिन्दे का उदाहरण दिया है जो प्रशान्त महासागर के इलाक़ों में पाया जाता है स्थानान्तरण करने वाले ये पक्षी 24000 कि.मी. की दूरी 8 के आकार में अपनी परिक्रमा से पूरी करते हैं ये परिन्दे अपनी यात्रा हर महीने में पूरी करते है और प्रस्थान बिंदु तक अधिक से अधिक एक सप्ताह विलम्ब से वापिस पहुंच जाते हैं। ऐसी किसी यान्ना के लिये बहुत ही जटिल जानकारी का होना अनियार्य है जो उन परिन्दों की विवेक कोशिकाओं में सुरिक्षत होनी चाहिए । यानी एक नीतीबद्धकार्यक्रम परिन्दे के मस्तिष्क में और उसे पूरा करने की शक्ति शरीर में उप्लब्ध होती है। अगर परिन्दे में कोई प्रोग्राम है तो क्या इससे यह ज्ञान नहीं मिलता कि इसे आकार देने वाला कोई प्रोग्रामर भी यक़ीनन है?

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