Mujhe Islam ki Jeevan Vayavastha, Muhammad (saw) ki Biviyon Aur Sathiyon ki Jeevni Ne Muslim Hone ke Liye Prerit Kiya – Marilyn Mornington


मुझे इस्लाम की जीवन व्यवस्था, मुहम्मद (सल्ल.) की बीवियों और साथियों की जीवनी ने मुस्लिम होने के लिए प्रेरित किया – मैरीलीन मॉरनिंगटॉन (इंग्लैंड की महिला जज) 

“सर्वशक्तिमान ईश्वर ने मुझे सच्ची राह दिखाई जिसके अलावा कोई और सीधा और सच्चा रास्ता नहीं है। मैं जितना ज्यादा इस्लाम और पैगम्बर मुहम्मद सल्ल. के बारे में जानती और समझती गई मुझे एहसास होता चला गया कि मैं उसी राह पर चल रही हूं जिसकी मुझे तलाश थी और यही वह राह है जहां मुझे होना चाहिए था।

” यह कहना है इंग्लैंड की महिला जज मैरीलीन मॉरनिंगटॉन का जिन्होंने इस्लाम को समझने के बाद इसे अपना लिया। 
मैरीलीन मॉरनिंगटॉन इंग्लैंड में जिला न्यायाधीश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय लेक्चरर और घरेलू हिंसा व पारिवारिक कानून विषय की लेखिका हैं। मैरीलीन मॉरनिंगटॉन ने 1976 में वकालत की डिग्री हासिल की और 1976 से लिवरपूल में पारिवारिक कानून से जुड़े मामलों की प्रेक्टिस करने लगी। वे चालीस साल की उम्र में 1994 में लिवरपूल के नजदीक स्थित ब्रिकेनहेड शहर में डिस्ट्रिक्ट जज के पद पर नियुक्त हुईं। मॉरनिंगटॉन चालीस साल की उम्र में जिला न्यायाधीश के पद पर नियुक्त होने वाली पहली वकील थीं। मैरीलीन वल्र्ड एकेडमी ऑफ आर्ट्स एंड सांइस की शोधार्थी के रूप में चुनी गईं। मैरीलीन घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों की अच्छी जानकार है और उन्हें इस क्षेत्र में काफी सम्मान की नजर से देखा जाता है और इस फील्ड से जुड़े विभिन्न ओहदों पर वे कार्यरत्त हैं । इस्लाम अपनाने से पहले दस से बारह वर्षों तक उन्होंने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाली हिंसा से जुड़े केसों पर काम किया। मुसलमानों के बीच जाकर भी उन्होंने महिला और बच्चों के खिलाफ होने वाली हिंसा का अध्ययन किया। मुस्लिम कम्युनिटी में इस मसले को बेहतर तरीके से समझने के लिए उन्होंने इस्लाम का अध्ययन शुरू कर दिया और मुसलमानों के बीच घुलने-मिलने लगीं। हालांकि सच्चाई का मार्ग नजर आ जाने पर साहसिक कदम उठाकर इसे अपना लेना हर एक के लिए इतना भी आसान नहीं है। परिवार, दोस्त और समाज से जुड़े कई मामले उसकी राह में रोड़ा बनने का काम करते हैं लेकिन मॉरनिंगटॉन का मामला इससे अलग था। इस्लाम अपनाने के अलावा उनके पास दूसरा कोई विकल्प नहीं था बल्कि वह तो बेहद अभिभूत थी कि ईश्वर ने उसका मार्गदर्शन कर उसको सीधी और सच्ची राह दिखाई।
मशहूर मुस्लिम विद्वान हम्जा युसूफ ने जब जज मैरीलीन मॉरनिंगटॉन से पूछा कि आप मुसलमान क्यों बन गईं ?  उनका जवाब था –
 “मुझे महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध और महिला व बच्चों के विरुद्ध होने वाली हिंसा के मामलों में दक्षता हासिल है। ब्रिटेन सरकार की पॉलिसी के तहत मैंने दस से बारह वर्षों तक इस क्षेत्र में काम किया। यह मेरी इच्छा नहीं बल्कि मेरे काम की जरूरत थी कि मुझे ब्रिटेन के मुस्लिम समुदाय के बीच महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा का अध्ययन करने के लिए उनके बीच जाना पड़ा, उनसे जुड़ाव बनाना पड़ा।

मुस्लिम महिलाओं से जुड़े मामलों को बेहतर तरीके से समझने के लिए मैंने इस्लाम का अध्ययन करना शुरू किया। मैं कुरआन पढऩे लगी और मुसलमानों के बीच घुलने मिलने लगी।

- मैं कहना चाहूंगी कि यह मेरे बूते की बात नहीं थी कि मैंने इस सच्चे रास्ते को अपनाया बल्कि यह तो उस सच्चे सृष्टा का मेरे पर करम था कि उसने मुझो सीधी और सच्ची राह सुझाई। रब के उसी मार्गदर्शन के बाद मैं एक के बाद दूसरे शख्स से मिलती गई, ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाती गई और उनसे मिली रहनुमाई का नतीजा है कि आज मैं इस सच्ची राह पर हूं जहां से दूसरा कोई रास्ता नहीं निकलता।

- मैं इस्लाम और पैगम्बर मुहम्मद सल्ल. के बारे में मैं जितना जानती और समझती गई मेरा यकीन उतना ही बढ़ता गया और मुझे एहसास हो गया कि जो सच्ची राह मेरे लिए होनी चाहिए थी मैं उसी की ओर आगे बढ़ रही हूं और यही मेरे मुताबिक भी सच्ची राह थी। मुझे इस्लाम की पारिवारिक जीवन व्यवस्था, पैगम्बर मुहम्मद सल्ल. की बीवियों और साथियों की जीवनी अच्छी लगी। मैंने आपके (शेख हम्जा) के इस्लाम संबंधी लेख पढ़े, कैसेट्स सुने। और इस सबके बाद मुझे पूरा यकीन हो गया कि यही कामयाब जिंदगी है।’

-Ishtiyaque.com
 Courtesy : Taqwa Islamic School
 Islamic Educational & Research Organization (IERO)
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