- जिसे अब भी लगता है कि ISIS मुसलमानों से हमदर्दी रखता है, वो इराक के कब्रिस्तान देख ले - Writer Rajeev Sharma
कल रात को सभी टीवी चैनलों पर 39 भारतीयों की मौत की खबर प्रसारित हो रही थी। उनके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। तस्वीरें बहुत हृदय विदारक थीं। मैं ज्यादा देर तक देख नहीं पाया। वहीं सोशल मीडिया पर लोग उनके परिवारों से हमदर्दी जताने के बजाय एक दूसरे की टांग खींचने में लगे हैं। हमें शर्म आनी चाहिए, ऐसे वक्त में देश को एकजुटता दिखानी चाहिए, लेकिन हम आज भी कांग्रेसी-भाजपाई बनने से नहीं चूके। भाइयो, कभी तो भारतीय बन जाओ।
मुझे सबसे ज्यादा तरस उन लोगों की बुद्धि पर आता है जिन्होंने कल रात को मुझे यह मैसेज भेजा कि आईएस के आतंकियों ने हमारे 39 देशवासी भाइयों को तो मारा लेकिन 40 बांग्लादेशियों को छोड़ दिया। मैं पूछना चाहता हूं — क्या आपको खुशी होती अगर वे लोग उन 40 बांग्लादेशियों को भी मार डालते?
दरअसल आतंकियों ने ऐसा इसलिए नहीं किया कि उन्हें बांग्लादेशियों पर अचानक से रहम आ गया। उन्होंने यह इसलिए किया ताकि भारत में तनाव का माहौल हो, हिंदू और मुसलमान एक दूसरे को शक की निगाहों से, नफरत की निगाहों से देखने लगें। मुझे अफसोस होता है कि जिस काम का मंसूबा आईएस रखता है, उसे सोशल मीडिया की मदद से हम ने ही कामयाब बना दिया। जो आईएस चाहता था उसे वॉट्सअप के वीरों ने कर दिखाया।
आईएस के आतंकियों ने हमारे 39 देशवासियों को इसलिए मारा क्योंकि वे (आतंकी) इन्सानियत के दुश्मन हैं। अगर किसी को अब भी लगता है कि आईएस मुसलमानों से हमदर्दी रखता है तो वह इंटरनेट पर सीरिया व इराक की तस्वीरें देख ले। आईएस अब तक लाखों मुसलमानों का कत्ल कर चुका है। इराक में तो इतनी मौतें हुईं कि कब्रिस्तान कम पड़ गए।
इन दोनों खूबसूरत देशों को वह खंडहर के ढेर में तब्दील कर चुका है। क्या इन्हें देख आप फिर भी कहेंगे कि आईएस मुसलमानों से बहुत मुहब्बत करता है? नहीं, आईएस एक खूनी संगठन है जो हर इन्सान का खून पीना चाहता है। उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह किसका है। उसका इस्लाम से कोई ताल्लुक नहीं है।
अगर आईएस सरगना और उसके गिरोह को इस्लाम का जरा भी ज्ञान होता तो वे क़ुरआन की 5वीं सूरह में 32वीं आयत पढ़कर अब तक शर्म के मारे मर चुके होते जिसमें साफ कहा गया है कि अगर किसी ने एक बेगुनाह की हत्या की तो मानो उसने संपूर्ण मानवता की हत्या कर दी।
उन 39 भाइयों को विनम्र श्रद्धांजलि। हमारी संवेदनाएं उनके परिजनों के साथ हैं। मैं खासतौर से मुस्लिम धर्मगुरुओं से कहना चाहूंगा कि वे उनके परिजनों के दुख में शामिल हों। ये उनसे ज्यादा आपके लिए इम्तिहान की घड़ी है।
उनके परिजन और आने वाली पीढ़ियां यह कभी नहीं देखेंगी कि क़ुरआन में क्या लिखा है, लेकिन समाज के कुछ शातिर लोग उनके दिलों में यह गलतफहमी जरूर पैदा कर सकते हैं कि उनकी हत्या मुसलमानों ने की है।
दुनिया को बताएं कि आईएस इस्लाम का सबसे बड़ा दुश्मन है। दुआ करें कि बगदादी और उसके गिरोह का सर्वनाश हो!
— राजीव शर्मा (कोलसिया) —की फेसबुक वॉल से,
https://www.facebook.com/writerrajeevsharma/
कल रात को सभी टीवी चैनलों पर 39 भारतीयों की मौत की खबर प्रसारित हो रही थी। उनके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। तस्वीरें बहुत हृदय विदारक थीं। मैं ज्यादा देर तक देख नहीं पाया। वहीं सोशल मीडिया पर लोग उनके परिवारों से हमदर्दी जताने के बजाय एक दूसरे की टांग खींचने में लगे हैं। हमें शर्म आनी चाहिए, ऐसे वक्त में देश को एकजुटता दिखानी चाहिए, लेकिन हम आज भी कांग्रेसी-भाजपाई बनने से नहीं चूके। भाइयो, कभी तो भारतीय बन जाओ।
मुझे सबसे ज्यादा तरस उन लोगों की बुद्धि पर आता है जिन्होंने कल रात को मुझे यह मैसेज भेजा कि आईएस के आतंकियों ने हमारे 39 देशवासी भाइयों को तो मारा लेकिन 40 बांग्लादेशियों को छोड़ दिया। मैं पूछना चाहता हूं — क्या आपको खुशी होती अगर वे लोग उन 40 बांग्लादेशियों को भी मार डालते?
दरअसल आतंकियों ने ऐसा इसलिए नहीं किया कि उन्हें बांग्लादेशियों पर अचानक से रहम आ गया। उन्होंने यह इसलिए किया ताकि भारत में तनाव का माहौल हो, हिंदू और मुसलमान एक दूसरे को शक की निगाहों से, नफरत की निगाहों से देखने लगें। मुझे अफसोस होता है कि जिस काम का मंसूबा आईएस रखता है, उसे सोशल मीडिया की मदद से हम ने ही कामयाब बना दिया। जो आईएस चाहता था उसे वॉट्सअप के वीरों ने कर दिखाया।
आईएस के आतंकियों ने हमारे 39 देशवासियों को इसलिए मारा क्योंकि वे (आतंकी) इन्सानियत के दुश्मन हैं। अगर किसी को अब भी लगता है कि आईएस मुसलमानों से हमदर्दी रखता है तो वह इंटरनेट पर सीरिया व इराक की तस्वीरें देख ले। आईएस अब तक लाखों मुसलमानों का कत्ल कर चुका है। इराक में तो इतनी मौतें हुईं कि कब्रिस्तान कम पड़ गए।
इन दोनों खूबसूरत देशों को वह खंडहर के ढेर में तब्दील कर चुका है। क्या इन्हें देख आप फिर भी कहेंगे कि आईएस मुसलमानों से बहुत मुहब्बत करता है? नहीं, आईएस एक खूनी संगठन है जो हर इन्सान का खून पीना चाहता है। उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह किसका है। उसका इस्लाम से कोई ताल्लुक नहीं है।
अगर आईएस सरगना और उसके गिरोह को इस्लाम का जरा भी ज्ञान होता तो वे क़ुरआन की 5वीं सूरह में 32वीं आयत पढ़कर अब तक शर्म के मारे मर चुके होते जिसमें साफ कहा गया है कि अगर किसी ने एक बेगुनाह की हत्या की तो मानो उसने संपूर्ण मानवता की हत्या कर दी।
उन 39 भाइयों को विनम्र श्रद्धांजलि। हमारी संवेदनाएं उनके परिजनों के साथ हैं। मैं खासतौर से मुस्लिम धर्मगुरुओं से कहना चाहूंगा कि वे उनके परिजनों के दुख में शामिल हों। ये उनसे ज्यादा आपके लिए इम्तिहान की घड़ी है।
उनके परिजन और आने वाली पीढ़ियां यह कभी नहीं देखेंगी कि क़ुरआन में क्या लिखा है, लेकिन समाज के कुछ शातिर लोग उनके दिलों में यह गलतफहमी जरूर पैदा कर सकते हैं कि उनकी हत्या मुसलमानों ने की है।
दुनिया को बताएं कि आईएस इस्लाम का सबसे बड़ा दुश्मन है। दुआ करें कि बगदादी और उसके गिरोह का सर्वनाश हो!
— राजीव शर्मा (कोलसिया) —की फेसबुक वॉल से,
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