शर्मनाक- पत्रकारिता पर एक ओर धब्बा- होस्टल की कथित बंधक छात्राओं को बताया मदरसा छात्राएं




                  - मैलकम  X ने कहा था-


     ‘अगर  अाप  अखबार ठीक  से नही समझेंगे  तो  अाप  को  पिड़ीत   ज़ालिम, और  ज़ालिम  मसीहा  नज़र  आयेगा “


इस देश के भविष्य को अगर आप देखना चाहते हैं तो तसव्वुर कीजिये सुबह आपके घर मे पड़े अखबार की फ्रंट पेज हेडिंग पर, जिसमें से आपको किसी खास तबके के मुफ़लिस लोगों बदनाम करने की लगातार साजिशों ओर षडयंत्रो से गुथी हुई खबरो की बद-बू से आपका दिमाग चाय का कप खाली होते होते सडा देंगी।
   ऐसा हर रोज़ लगभग हर अखबार में आपको मिल ही जायेगा, लेकिन कुछ दिनों से अखबारों और समचार चेनलो ओर फर्जी न्यूज़ पोर्टल्स ने नीचता की हदों को  फलांगकर बेशर्मी के क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित कर झंडे गाड़ दिये हैं। 
      जी हां हम बात कर रहें हैं आज देश की प्रमुख समाचार एजेंसी “हिंदुस्तान” की, कहते हैं देश के लोगो को किस दिशा में ले जाना है वो मीडिया के हाथ मे हैं, दिमाग मे गोबर भरे पत्रकार इस देश के पाठकों के मस्तिष्क में भी गोबर भरने का भरसक प्रयत्न कर रहे हैं। दैनिक अखबार हिंदुस्तान जिसके लाखो पाठक हैं ने आज सुबह अपनी अखबार के फ्रंट पेज पर एक फर्जी खबर लगाई है जिसमे लिखा है -“मदरसे में बंधक 51 लड़कियां छुड़ाईं” इस हेडिंग को पढ़कर ही लगता है कि अखबार को कहाँ से फंडिंग जो रही है, अखबार के संपादक व्हाट्सप यूनिवर्सटी के टॉपर लगते हैं। तभी तो बिना जांच परख के ही ऐसा आर्टिकल पब्लिश कर दिया जिससे हकीकत का कोई संबंध ही नही  है।
       अखबार में लिखी घटना की पड़ताल की गई तो पता चला कि ये दो पार्टियों का आपसी झगड़ा है। ये एक PG (पे इन गेस्ट) गर्ल्स होस्टल है दूर दराज से शिक्षा ग्रहण करने आई लड़कियां रहती हैं। जिसमें एक पार्टी ने दूसरी पार्टी पर ये आरोप लगाया की उक्त होस्टल संचालक उसके बराबर में सटे मदरसे पर जिसमे वो टीचर भी है पर कब्जा करना चाहता है। 
लखनऊ के एक सोशल एक्टिविस्ट सलमान सिद्दीकी ने जमीन स्तर पर पड़ताल करने के बाद लिखा है –
मैं लखनऊ से हूँ ! बात ये है कि मदरसे के जो संस्थापक हैं (उन्ही की ज़मीन भी है) , उनको शक़ हुआ कि जिस आदमी को उन्होंने मदरसे में पढ़ाने के लिए रखा है, वो कब्ज़ा करना चाहता है ! उसने होस्टल टाइप भी शुरू कर दिया जो कि नहीं होना चाहिए ! उसको ठिकाने लगाने के लिए ये ड्रामा किया गया ! सीधी उँगली से घी नहीं निकल रहा था तो उंगली टेढ़ी कर ली गयी ! बाकी मीडिया की बकवास एक झूठे प्रोपगेंडे से ज़्यादा कुछ नही है !

     

इसके बाद पुलिस ने मदरसे पर अपना काम किया और रही सही कसर मीडिया ने तोड़ दी ही।
    सोशल मीडिया पर इस खबर को लेकर काफी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं एक फेमस सोशल एक्टिविस्ट Shadan Ahamad ने इस मामले की जड़ तक जाकर सरकार को घसीटा है
Shadan Ahmad लिखते हैं
खबर  यह  आ  रही  है  के  मीडिया  जिसको  मदरसा बता  के  बदनाम करने  के  लिएे  खबर  चालाया  वोह  दरसल Woman Pg  था .
मदरसों में  तो  उनको  कुछ  मिल  नही  पाता , तुफान  मचा नही  पा  रहा .
अब  यह  मीडिया  वाले  PG  को  मदरसा क्यूँ  बताया  ,यह  तो  अाप  समझ  ही  गयी  होंगे . मीडिया  का  one  point  agenda दिन  रात  का  एक  ही  है   इस्लाम  से  नफरत पैदा करना  .
जिस  तरह  से  अाप  का कोई    नेता  नही  है  वैसा  ही  कोई  बड़ा  tv  मीडिया अाप  के  पास   नही  है  जो  सच  दिखा  के  इनको  बेनकाब कर  पाये .

Shasan Ahmad की दूसरी में उन्होंने फिर लिखा

लोगों  ने  पहले  ही  आगाह  किया  था  जिस  रफतार  से  ब्रहामन  बाबा  लोग अश्रामों  में  धरा  रहे  हैं  ,बैलन्स बनाने  के  लिएे  किसी  ना  किसी  मुल्ले  की  गर्दन जल्दी  चाहिए  ,मदरसा टार्गेट   हो  सकता  है  .
लखनऊ में   मुफ़ति पर  इलजाम  लगाया  गया  है  पिटायी का , मगर  मामला  बाबाओं  के  बराबार  करने  के  लिएे  पुरी  तरह  से  यौन  शोषन का  बना  के  दिखा  दिया  गया है   , जबकी  खाना  बनाने  वाली  औरत  जो  रोज़  मदरसे में  जाती  थी  साफ  कह  रही  है  हमने  कभी  ऐसा  नही  देखा  . जिन  की  बच्चियां  पढती  थीं  उनकी  माँ  कह  रही  है हमारी  बच्चियों  ने  कभी  ऐसी  शिकायत  नही  की  .
SP  साहब  तिवारी  जी  बड़े  सक्रये   हो  गये  हैं ,मीडिया  लिखती  है  लड़कियों  को ‘Rescue ‘ किया  गया .काहे  का  Rescue  बे  , आश्रम  की  तरह   वहां  लठइत ,बन्दुक धारी   गुंडे  थे  जो   बंधक  बनाये  हुए  थे  लड़कियों को  ताक़त  से  ?
बाबाओं  के  आश्रम को  तो पुलिस  घेर कर  कितने दिन  रखती   थी  ,अंदर  से  गोली  चलती  थी  . यहा  तो किसी  लड़की  ने  छत से प्रताड़न होने का खत गिराया (रेप  की  शिकायत  ही  नही  है  ,बुरे  व्यवहार  की  शिकायत है ) तो  खबर  मिलते  ही    मदरसे  के  मालिक  और  अन्य  लोक़ल  मुस्लिम  ने  पुलिस  बुलाया  और  मुफती  को  गिर्फतार  करवाया .यह  बुनियादी  फर्क  है  मानसिकता  का  ,दूसरा एंगल जो आ रहा है जैसा लखनऊ के लोकल बता रहे हैं के ज़मीन का मामला है, ज़मीन के मालिक को ज़मीन वापस चाहिए थी।
फिर  ‘Rescue ‘ कैसे  हुआ  बे  . शिकायत  हुई  होस्टेल  को  सिल कर  दिया  गया  ,सही  गलत  बाद  में  पता चलेगा   पर  मुस्लिम पहले  लड़कियों  के  समर्थन में  खड़े  हुए   .

Ali Sohrab (काका) ने तंजिया लहजे में टिप्पणी की है-



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