अल्लाह जब चाहे तब अपने किसी भी बंदे पर अपने इनामात की बारिश कर देता है, वह चाहता है तो होता है वह न चाहे तो कोई तकात नहीं जो ज़र्रा बराबर भी कुछ कर दे| दीन-ए-इस्लाम अपनी तमाम खूबियों की वजह से तमाम अालम के लोगो को अपनी तरफ मुतवजह करता है| इस्लाम मज़हब कामयाबी है दुनियाँ और अाखिरत की, बच्चा जब अपनी मा की कोख मे होता है तो वह सौच भी नहीं सकता कि कुछ दिन/महिनोंं के बाद वह एक ऐसे अालम/दुनियाँ मे होगा जहां अासमान को छूते पहाड़ होंगे, दरख्त, दरिया और समंदर होंगे, जहां मकान, और अासमान होंगे, अासमानों मे चांद और ला महदूद सितारे होंगे| ये जो कुछ है जिसको हम देखते हैं और वह जिसको हम देख नहीं सकते सब कुछ अल्लाह ही का बनाया हुअा है| इंसान जब इस दुनियाँ मे एक तै उमर जोकि उसके पैदा करने वाले ने मुकर्रर की हुई है गुज़ार कर चला जाता है तो वहाँ उसका मुअामला उसके दीन और अमाल पर तै होता है| इस छोटी सी ज़िन्दगी मे इंसान को जब अाखिरत की ख़बर और वहाँ की ज़िंदिगी के बारे मे बताया जाता है तो वह झुटलाने लगता है और अक्सर तो लोग कहते हैं कि जो भी कुछ है वह यही है और मरने के बाद कुछ नहीं पर ये सिर्फ इंसानी कम अकली की दलील है| इन्सान अपनी पैदाइश को क्यूँ भूल जाता है|इस्लाम मज़हब इंसान की कामयाबी का ज़ामिन है इस जहान और अाखिरत मे, अल्लाह हम सब को राहे मुस्तकीरम पर चलने की तोफीक/हिदायत दे| अल्लाह तू बुरी मौत से हिफाज़त करना, या रब सारी तारीफ तेरे ही लिये है, सारी बादशाहत तेरे लिये है, ऐ मे्रे खुदा तू जानने, सुनने और देखने वाला है, तू रहीम है, परवरदिगार तू हम सब की हिफाज़त फरमा गुनाहों से, ज़ालिमों, हासिदों, ज़ाहिलों से, झूठ, ग़ीबत, मकरो फरीब से, या अल्लाह तू हमारे लिये दीन पेे चलना अासन कर दे, परवरदिगार तू हम सब के दिलों को नरम कर दे, और दीन की रोशनी से मुन्नवर कर दे| अमीन
Courtesy - TeesriJung_News
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